प्रश्नोत्तर P19-0152 · भाग 19
गुरु जी, ब्रह्म, जीव और माया में क्या भेद है?
भेद केवल इच्छा और अपेक्षा का है, और कोई भेद नहीं। इच्छा-अपेक्षा के कारण ही अलगाव है। आत्मा इच्छा-अपेक्षा में फंसकर जीव बन गई है, इसलिए उसे जीवात्मा कहते हैं। जैसे ही इच्छा-अपेक्षा हटेगी, जीव का नाश हो जाएगा — जैसे पानी से बर्फ बनी, बर्फ को फिर उसी जगह ले आओ तो बर्फ का नाश हो जाता है, पता नहीं चलता कहां से आई कहां गई। आत्मा या तो माया में रहेगी, जीवात्मा बनकर, या ब्रह्म में; दोनों जगह एक साथ नहीं रह सकती।
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वीडियो: ब्रह्म जीव और माया में क्या भेद है ? #yogijikasatsang #aadhyatmik_satsang #livesatsang #gyan · 2024-12-26