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प्रश्नोत्तर P19-0159 · भाग 19

गुरु जी, जो हमें सुधारना चाहता है उसे बर्दाश्त कैसे करें, जब हम ही सुधरना न चाहें?

बर्दाश्त इसलिए नहीं करते कि आपके अहम भाव को ठेस पहुंचती है, अपमान लगता है — जबकि उसका भाव अपमान करने का नहीं है। ऐसा लगता है कि यह बात अकेले में भी कही जा सकती थी, पर अकेले में तुम सुधरोगे नहीं; अकेले-अकेले में तो तुमने जिंदगी को नर्क बनाया है। बिगड़े समाज में हो, तो सुधारने के लिए समाज के बीच में ही डांटना पड़ेगा।

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वीडियो: ब्रह्म जीव और माया में क्या भेद है ? #yogijikasatsang #aadhyatmik_satsang #livesatsang #gyan · 2024-12-26