प्रश्नोत्तर P2-0036 · भाग 2
गुरु जी, आज स्वार्थ चरम पर है; ऐसे में ‘कुछ नहीं चाहिए’ में मनुष्य अपना क्या लाभ देखे?
‘कुछ नहीं चाहिए’ का मतलब होता है कि आप बेईमानी करना छोड़ दो। राग, द्वेष, मोह, आसक्ति, इच्छा, अपेक्षा और ‘मेरा’ के भाव से अपने आप को मुक्त करो।
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