प्रश्नोत्तर P2-0053 · भाग 2
क्या साक्षी भाव ही मोक्ष का द्वार है? और रास्ता क्या है? क्या गृहस्थ के लिए साक्षी भाव संभव है?
साक्षी भाव का मतलब होता है — मैं अपने कर्म को करते हुए देख रहा हूं कि मैं पूरी ईमानदारी से, निष्काम कर्म कर रहा हूं। कर्म ही पूजा है — यह मैं साक्षी भाव से देख रहा हूं, और इस कर्म से मेरा उद्धार हो जाएगा। यह साक्षी भाव है।
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