आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P2-0102 · भाग 2

गुरु जी, (कुटिया में) वाईफाई लगाने वाले ने जो गलत काम किया, उसे लेकर अगर हम दुखी हो रहे हैं, तो क्या यह द्वेष हुआ?

नहीं, द्वेष नहीं हुआ, क्योंकि उसने ऐसा काम किया। द्वेष तो तब होता है जब हम उससे फ्री की कोई उम्मीद रखते और वह नहीं देता; योग्यता से ज्यादा कुछ मांगते, तब राग-द्वेष होता — दे तो राग, न दे तो द्वेष। ऐसा कुछ है ही नहीं; हमने कोई अनुचित मांग नहीं की, फ्री में कुछ नहीं चाहा, हमने तो उसका मूल्य दिया है। गलत वह है, तो राग-द्वेष नहीं होगा। और आप किसी से भी जुड़े हो, एक-दूसरे को समझते हो, तो आपके जीवन में कुछ होता है तो जितने लोग आपसे जुड़े हैं उन्हें दुख होता है; यह राग-द्वेष नहीं है। यह जीवन है। यहां कुछ भी करोगे तो संघर्ष है, लड़ाई है, युद्ध है। अगर मैं सत्संग और भ्रमण ही करता रहता, कुछ नहीं करता, तो न किसी से लड़ना था, न झगड़ना। लेकिन जब काम कर रहा हूं, तो उस काम में अनेक तरह के लोग हैं, अनेक प्रवृत्तियां हैं — देव प्रवृत्ति, राक्षस प्रवृत्ति, मानव प्रवृत्ति — ये अपने-अपने स्वभाव से काम करेंगे। तो लड़ाई करनी पड़ती है, युद्ध करना पड़ता है, क्योंकि आपको कुछ करना है। सबका अपना-अपना दृष्टिकोण है, अपनी-अपनी मति है — किसी को सही करके अच्छा लगता है, किसी को गलत करके।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: 17 सुबह अपनों की कुटिया हरियाणा यमुना तट #योगी · 2026-10-10