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प्रश्नोत्तर P20-0115 · भाग 20

क्या आपको केदारनाथ और उस भूखी रात में मौत से डर नहीं लगा?

खूब डर था — मृत्यु से भयभीत था, रोंगटे खड़े हो गए, कांप गया; आज भी वह घटना बोलते हुए आंखों में आंसू आ जाते हैं। लेकिन फैसला मैंने वही लिया जो लेना था, जिसमें मेरा हित था। मैंने कहा कभी तो अंत होना ही है, तो कायर की तरह मरने से अच्छा है वीरगति को प्राप्त हो — खोज में जाओ, गिरने में मत जाओ। परीक्षा इसलिए हो रही है कि कहीं गिरा था, मतलब अब उठने वाला हूं; जाना तो पक्का है, तो परीक्षा देते हुए, उठने में चले जाओ।

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वीडियो: ऐसा क्या करूं, जो तेरी सेवा हो पाए ? #योगीजी_का_सत्संग · 2025-09-02