आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P20-0159 · भाग 20

"जो है सो है" की स्थिति क्या है — क्या उसमें स्वीकार करना भी रहता है?

एक समय ऐसा आएगा कि कुछ भी नहीं चाहिए, चाहिए में भी कुछ नहीं चाहिए — सब छूट जाएगा, जो है सो है, बात खत्म। "जैसा है" वाला भी खत्म, इसके आगे-पीछे कोई सेंटेंस नहीं। उसमें स्वीकार भी खत्म, क्योंकि स्वीकार करोगे तो भाव जागेगा; स्वीकार करने वाला और अस्वीकार करने वाला दोनों गए। मानना उसे पड़ता है जो नहीं है; जो है उसमें मानना-न मानना सब खत्म — यह अंतिम स्थिति है।

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