प्रश्नोत्तर P20-0189 · भाग 20
अगर राग-द्वेष छोड़कर वापस स्व में आ जाए, तो पहले भी तो वह स्व ही था — फिर वह बंधा क्यों, क्या फिर से बंध सकता है? यह सर्कल तो चलता ही रहेगा?
फिर जा सकता है, उसकी स्वतंत्रता है — किसी ने अपराध किया, कैदखाना हुआ, छूटा; वह चाहे तो फिर अपराध करके जेल जा सकता है। यह आपके ऊपर है, आपके हाथ में है; जब चाहो अपने आप को भ्रष्ट कर दो — वह आपकी गलती है, आप करो, भोगो। सारी गलतियां हम समझ के ही तो कर रहे हैं, अभी भी — तो छोड़ दो ना। आपको कर्ता का अधिकार दिया गया है; पृथ्वी पर किसी अन्य जीव को न पाप लगता है न पुण्य, बस मानव फंसा है। इच्छा हम पैदा करते हैं — पहले जरूरत थी, बाद में इच्छा आई, इच्छा अपने आप नहीं आई; इसीलिए तो इच्छा से मुक्त होना है। कितने महापुरुष हुए, उन्होंने भी भोजन मांगा, स्वाद भी मिला होगा; पर जब योग्यता से ज्यादा चाहिए, तब इच्छा पैदा करनी पड़ती है, और अपने तरीके से मिला तो सुख, नहीं मिला तो दुख।
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वीडियो: इच्छा अपेक्षा क्या है?इससे कैसे मुक्त होते है?(Freedom from Desire & Expectation) Explained in Hindi · 2026-03-07