प्रश्नोत्तर P20-0199 · भाग 20
जो संसार में बैठा है और इच्छा-अपेक्षा छोड़कर कुदरती जीवन जीना चाहता है, उसका तो पूरा जीवन निकल जाए — क्या स्व को जानने का यही एक माध्यम है, यह तो बहुत कठिन है?
जितने लोगों ने छोड़ा — हम भी तो गृहस्थ से ही आए हैं, क्या आसमान से गिरे हैं? किसी मां-बाप से मेरा जन्म हुआ, मेरे भी भाई-बहन थे, और हमने अपने आप को निकाला। बच्चे को सिखाने वाला कहता है एकदम सरल है, क्योंकि कह दो "बहुत जटिल है, तुम नहीं सीख पाओगे" तो उसका आत्मविश्वास गिर जाएगा — हमें आपके आत्मविश्वास को ऊपर उठाना है, गिराना नहीं। हां, यही माध्यम है, और कोई माध्यम नहीं; जब तक इसे नहीं छोड़ोगे, हो भी नहीं पाएगा, क्योंकि इच्छा-अपेक्षा में ही तो आप बाहर हो, अनेक पिंडों में फंसे हो — और यह आप ही कर सकते हो। तरीका आसान है: योग्यता से ज्यादा पाने की उम्मीद का त्याग करो; कुछ चाहिए तो उसके लिए काम करो, मेहनत करो। मैं यह नहीं कहता जितना है उसी में जियो — जितना चाहो उतने में जियो, लेकिन वह आपका होना चाहिए, आपकी ताकत से; कमजोरी में ज्यादा पा गए तो राग-द्वेष अपने आप हो जाएगा।
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वीडियो: इच्छा अपेक्षा क्या है?इससे कैसे मुक्त होते है?(Freedom from Desire & Expectation) Explained in Hindi · 2026-03-07