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प्रश्नोत्तर P21-0031 · भाग 21

शबरी जंगल में रहकर इंतजार करती थी — क्या कोई अपने ही घर, किसी खाली फ्लैट में एकांत करके यह सब नहीं कर सकता, जैसे घरवाले कहते हैं "यहीं व्यवस्था कर देते हैं"?

"मेरा" में नहीं होगा। शबरी ने इंतजार किया तो गुरु का आदेश था कि तुम्हें इंतजार करना है, राम आकर दर्शन देंगे — गुरु के आदेश से वहां रुकी थी, सारी जिम्मेदारी गुरु की थी। तेरा में तो निकलना पड़ेगा; यह "मेरा" आपके अहंकार को पोषित करता है, यह कवर तोड़ना ही पड़ेगा। जहां आपका मेरा है, वहां मान-प्रतिष्ठा-दबदबा है, कोई ऊंची आवाज में बात भी नहीं करेगा; जब आवरण हटाकर सामान्य नागरिक बनकर बाहर निकलोगे तो कोई भी बोल देगा, डांट देगा, धक्का मारेगा, दुत्कारेगा। तो अपने एरिया से बाहर निकलो, अपना बैकग्राउंड छोड़कर सामान्य व्यक्ति बनकर निकलो — मैंने फटे कपड़े ऐसे ही थोड़ी पहने थे। जब आवरण छोड़कर आप कमजोर हो जाओगे, तब लोग असली तरीके से, खुलकर बात करेंगे; आवरण का प्रभाव रहेगा तो जैसा आवरण, वैसी बात, और अहंकार पोषित होगा। प्रभाव वाला आवरण छोड़ दो, ऐसा आवरण धारण करो जिससे लोग प्रभावित न हों।

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वीडियो: मेरे भ्रमण की एक और जगह #योगी · 2026-01-27