प्रश्नोत्तर P21-0072 · भाग 21
गुरु जी, आज बारिश हो रही थी तो मन ने आने से रोक दिया, जबकि आप भी 12 साल पैरों में छाले लेकर चलते रहे — मन ऐसा क्यों रोक देता है?
आप मत रुको ना। मन नहीं रोकता, मन तो इंगित करता है। ना आने की इच्छा भी आप ही ने बनाई, आने की भी आपने बनाई; आपने आने पर जोर दिया तो आ गए — मन क्या कर लेगा? आए तो कुछ मिला ना। बस आप फैसला कर लो कि मुझे क्या चाहिए; जो चाहिए वहीं जाओगे। आपने फैसला किया कि चाहिए कुछ और और जाना कहीं और चाहते हो, तो उस तरफ कभी नहीं जा सकते। देखो ना, एक कागज पर जो पता लिख देते हो चिट्ठी वहीं पहुंच जाती है। इतनी ताकत तुम में है, क्योंकि तुम उस पूर्ण से हो, तुम भी पूर्ण हो — अपनी ताकत को पहचानो। आप फैसला करो आपको क्या चाहिए, वही चलेगा; मन का कोई रोल नहीं, रोल सारा आपका है।
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