प्रश्नोत्तर P21-0078 · भाग 21
गुरु जी, अध्यात्म के रास्ते पर चलते हुए, जब दिन-रात सत्संग ही चल रहा है, तो निर्विचार कैसे हुआ जाए?
निर्विचार कभी नहीं हुआ जा सकता, निर्विकार हुआ जा सकता है। विचार आएंगे; उन विचारों में राग-द्वेष नहीं होगा तो विचारों का प्रभाव आप पर काम नहीं करेगा। जितने लोग उस परम आनंद को उपलब्ध हुए, उन्हें भूख लगी तो भूख का विचार आया, तो भोजन लेने गए; ज्ञान देने का विचार आया कि ये बंधन में फंसा है, तब जाकर ज्ञान दिया — अगर ये विचार नहीं आता तो क्या वो ज्ञान दे पाते? इसलिए निर्विचार नहीं, निर्विकार — इसे पूरी तरह समझ लीजिए।
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वीडियो: हरियाणा सोनीपत में पुनः सत्संग 20 जुलाई 2026 #योगी · 2026-07-20