प्रश्नोत्तर P21-0082 · भाग 21
गुरु जी, लोभ-मोह कहीं-कहीं बहुत भारी हो जाता है, परिवार में फंसे हैं — यह कैसे छूटेगा?
वो छूटने का तरीका बता रहा हूं — योग्यता से ज्यादा पाने की उम्मीद का त्याग करो, बात खत्म। ये पूरा सार है, पूरे शास्त्रों का, पूरे महापुरुषों की वाणी का। नर्मदा तट पर एक रिटायर्ड टीचर कई दिन मेरे साथ रहे; उन्होंने कहा एक शब्द में बता दो जिसे लेकर मैं मुक्त हो जाऊं, तो मैंने कहा उम्मीद से मुक्त हो जाओ। परिवार को छोड़ना भी नहीं है, निभाना है। योग्यता से ज्यादा पाने की इच्छा का त्याग करो, तो बेईमानी वगैरह होगी ही नहीं — सब खत्म।
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वीडियो: हरियाणा सोनीपत में पुनः सत्संग 20 जुलाई 2026 #योगी · 2026-07-20