प्रश्नोत्तर P21-0091 · भाग 21
गुरु जी, कहते हैं गुरु को मनाना मुश्किल है और भगवान को मनाना आसान — क्या गुरु को मान की इच्छा ज्यादा होती है?
ना तो गुरु को मनाना आसान है, ना भगवान को। यहां कर्म से लोग आप पर प्रसन्न होते हैं। अगर आपका कर्म ही गंदा है तो आप खुद से नफरत करते हो, किसी को बता नहीं पाते। कोई व्यक्ति गंदा कर्म करे और आपको मनाए तो आप मानोगे? लेकिन कोई सत्कर्म करे तो उसके कर्म को देखकर आप उसका साथ दे दोगे। तो यहां कर्म से कोई मानता है — चाहे गुरु हो, चाहे भगवान। मूल आपका कर्म है।
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वीडियो: हरियाणा सोनीपत में पुनः सत्संग 19 जुलाई 2026 #याेगी · 2026-07-19