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प्रश्नोत्तर P21-0095 · भाग 21

गुरु जी, आपने कहा था कमल कीचड़ में खिलता है और यह संसार कीचड़ है — यह मुझे समझ नहीं आया।

कीचड़ का मतलब गंदगी — आप देखोगे तो हर जगह ज्यादा से ज्यादा बुराइयां ही दिख रही हैं। तो मुझे अपने आप को उस लायक बनाना है जैसे नर्मदा जी, गंगा जी हो गईं — इनमें गटर भी बह रहा है, सब गंदा बह रहा है, लेकिन इस पानी में कीड़े नहीं पड़ते। मुझे इसी गंदगी में कर्म भी करना है, क्योंकि मैं इसी में फंसी हूं, तो इसी में कर्म करके निकलूंगी — मुझ पर किसी का प्रभाव ना पड़े, ना अच्छे का ना बुरे का। सबका उपयोग करके आगे बढ़ जाना है: फूल की जगह फूल का उपयोग करो, कांटे की जगह कांटे का — कांटा धंसा है तो कांटा ही कांटे को निकालेगा, फूल नहीं। उपयोग करो, निकल जाओ — यही दुनिया है।

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