प्रश्नोत्तर P21-0104 · भाग 21
गुरु जी, मैं पुलिस विभाग से चार महीने पहले रिटायर हुआ हूं, बच्चे सेट हैं, पारिवारिक जिम्मेदारियों से फ्री हूं — अब मुझे किस तरफ चलना चाहिए? मार्गदर्शन दीजिए।
मुक्ति-मोक्ष के लिए आपके लिए सबसे अच्छा है पूरी तरह कुटिया, क्योंकि आपकी यहां की जिम्मेदारी खत्म हो गई है। वहां 24 घंटे साधना होगी; यहां कितनी करोगे — दो, चार, आठ घंटे, फिर फंसोगे। वहां का नियम ऐसा है कि व्यावहारिक बातें नहीं कर सकते, मोबाइल स्विच ऑफ, कोई किसी का नाम-पता नहीं पूछता — तो वहां फंसोगे नहीं, तेजी से यात्रा होगी। हर गृहस्थ को मेरा यही कहना है कि 11 महीने परिवार को दो, एक महीना अपने आप को दो — जहां भी एकांत मिले, व्यवहारिक बातें ना हों, मोबाइल बंद, और ईमानदारी का भोजन, ईमानदारी की व्यवस्था हो। आपका पुलिस वाला रुतबा अभी गया नहीं — वहां आकर रहो, सब खत्म हो जाएगा; या तो भाग जाओगे या सध जाओगे, क्योंकि अपनों की कुटिया में बैकग्राउंड काम नहीं करता, सबके लिए एक व्यवस्था है। जब समझ आएगा कि यही रुतबा मुझे गिरा रहा है, पुलिस का तो काम मिला था, वो खत्म हो गया, अब मैं एक सामान्य व्यक्ति हूं — तब वो चला जाएगा; बस वहां से भागना मत। वहां का कोई मालिक नहीं, यहां तक कि मुझसे भी मतलब नहीं — वहां शब्द है और नियम; कुटिया पूरी आग है। अपने लिए जीना चालू करो, शरीर को उतना दो जितने में चल सके। मैंने आत्मिक कल्याण की पूरी व्यवस्था कर दी है — ज्ञान, रहना, भोजन, पूरी पवित्रता के साथ; कोई भी जीव इसी जन्म में अपना आत्मिक कल्याण चाहे तो इसी जन्म में होगा। 100 नहीं, 101 प्रतिशत लग जाओ, कसर मत छोड़ो — आप लग गए तो दुनिया की कोई ताकत आपका आत्मिक कल्याण होने से रोक नहीं सकती।
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