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प्रश्नोत्तर P21-0116 · भाग 21

गुरु जी, फिर भी — मुझे एक्चुअली कहां होना चाहिए? उदाहरण से समझाइए।

अगर मैं कह दूं कि आपको उस परम आनंद में होना चाहिए, तो इसका कोई मतलब नहीं है। पहले आप जहां हो वहां से हटाओ — हटाने में ही आप जहां होना है हो जाओगे; क्योंकि कहीं होना है तो कर्ता का भाव आ जाएगा — कहीं तो आपने अपने आप को किया ही, उसी से परेशान हो। अब कहां होना है इसके लिए काम ही नहीं करना है। जैसे पानी से बर्फ बना तो उसके पीछे कोई कारण है — उस कारण को हटा दो और सिर्फ इंतजार करो, तो बर्फ का नाश हो जाएगा, पानी मूल में आ जाएगा; पानी बनने के लिए कुछ नहीं करना पड़ता। अगर कारण ना हटाओ और बर्फ के टुकड़े-टुकड़े कर दो, पीस दो, तो भी वो पानी नहीं बनेगा। जैसे मिट्टी से घड़ा बनाया — उसे मिट्टी होने के लिए कुछ नहीं करना, बस घड़े को तोड़ दो; घड़ा टूटेगा नहीं तो मिट्टी में आएगा ही नहीं। आपने अपने आप को बनाया है, उसे तो बिगाड़ना पड़ेगा — छुड़ाने में आपका बनाया हुआ अस्तित्व तो मिटेगा; बिगड़ने का डर है तो कभी मूल में आ ही नहीं सकते। मूल में आने के लिए कुछ नहीं करना पड़ता। इस पर गहरा चिंतन करो, अध्ययन करो।

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वीडियो: मुझे कहां होना है ? कलबुर्गी कर्नाटक में पुनः सत्संग 12 जुलाई 2026 #योगी · 2026-07-14