आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P21-0138 · भाग 21

गुरु जी, मेरा परिवार है, विवाह कर लिया है, उनकी जिम्मेदारी है — मैं परिवार और घर में रह के साधना करना चाहता हूं, तो कैसे करूं?

तो अब करो — उनको भी समय दो, इधर भी समय दो। पूरी तरह तो नहीं लग सकते, धीरे-धीरे लगते रहो। लेकिन एक समय ऐसा आएगा कि पूरी तरह छोड़ना पड़ेगा सब कुछ — वो तो एक समय आता है, छूट जाता है; जैसे एक समय आता है, फल पका और डाल से छूट गया, गिर गया। फल एक ही दिन में नहीं पक गया — धीरे-धीरे प्रोसेस है; एक दिन पका, हवा का झोंका आया और गिर गया। तो धीरे-धीरे प्रयास करते रहो, एक दिन हो ही जाएगा। बस ऐसा ना हो कि प्रयास किया, फिर छोड़ दिया, फिर शुरुआत की — लगातार प्रयास करो। कम से कम साल में एक महीना अपने आप को एकांतवास दो, ज्यादा दे सकते हो तो ज्यादा दो — अपने दायित्व-जिम्मेदारी निभाते हुए, लेकिन एक महीना तो पक्का पूरी तरह लगना पड़ेगा। चाहे जंगल में रहो, चाहे गृहस्थ में — लगना पड़ेगा अपने आत्मिक कल्याण के लिए, तभी होगा। बहुत लोग जंगल-हिमालय में हैं, उनको भी नहीं हुआ, क्योंकि वहां जाकर भी नशा कर रहे हैं — तुम रह के कर क्या रहे हो, वही होगा। इसलिए काम करो, लेकिन व्यवहारिक बात एक शब्द भी मत करना; जिस उपदेश को ले आए हो उसी पर काम करो। प्रयास करोगे तो हो ही जाएगा।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: 25 रात अपनों की कुटिया हरियाणा यमुना तट #योगी · 2026-10-19