प्रश्नोत्तर P22-0001 · भाग 22
गुरु जी, इससे ऐसा प्रतीत होता है कि जो जीव शरीर को चला रहा है उसी को निकाल दें, तो शरीर बेकार हो जाएगा, कुछ कर्म नहीं करेगा?
नहीं। क्या महापुरुषों ने कर्म नहीं किए — कृष्ण भगवान ने, राम ने कर्म नहीं किया? कर्ता के भाव से मुक्त होना है, अपने तरीके से करवाना है — उस तरीके का त्याग। कर्म तो जब तक रहना है तब तक करना पड़ेगा — ये कर्म भूमि है, बिना किए रह नहीं सकते; या तो अपने लिए, या दूसरों के लिए, कामनाओं-इच्छाओं में या दूसरों के लिए, करना तो पड़ेगा। महापुरुष जितने भी परमानंद को उपलब्ध हुए, भूख लगती थी तभी रोटी खाते थे, और ज्यादा खिलाओ तो कहते थे बस, अब नहीं — उनकी भूख शांत हो गई। तो करने से नहीं, कर्ता भाव से छूट जाओ — "मैं करता हूं" — जो करने का अहंकार धारण किया है, उस भाव से छूट जाओ।
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वीडियो: मैं कौन हूं ? कर्नाटक कलबुरगी में पुनः सत्संग 28 जून 2026 #योगी · 2026-06-29