प्रश्नोत्तर P22-0003 · भाग 22
गुरु जी, मुक्ति गुरु मिलने से ही मिलेगी, या मैं अपने आप को खुद ढूंढ सकता हूं?
अगर आप बंधन में भी गए हो तो कोई मिला — अकेले बंधन भी नहीं बांध सकते। बेईमानी भी आप तभी कर पाओगे जब आपके अपोजिट में कोई खड़ा हो, जब वो निमित्त बने। तो बंधन से छुड़ाने के लिए भी कोई चाहिए — वो गुरु है, ज्ञान का प्रतीक; एक बंधन में ले गया, एक बंधन से निकालने के लिए काम करेगा। आप बंधन में फंसे हो तो उसमें हजारों लोग लगे; अब आपके पास बल नहीं कि अकेले आ जाओ, तो ऐसा बलशाली व्यक्ति चाहिए जिसमें उन सारों का बल हो, तब वो आपको निकाल पाए। आपने बेईमानी कर ली तो ईमानदारी के लिए भी कोई निमित्त चाहिए — मुक्ति के लिए गुरु चाहिए, जो आपको मुक्ति का रास्ता बताए। किसी के द्वारा गए हो तो किसी के द्वारा ही आओगे ना।
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वीडियो: मैं कौन हूं ? कर्नाटक कलबुरगी में पुनः सत्संग 28 जून 2026 #योगी · 2026-06-29