आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P22-0072 · भाग 22

प्रभु जी, अब आपको आत्मज्ञान हो गया है — क्या आपका जन्म-मरण आपके हाथ में है, या अब आपका जन्म कभी नहीं होगा?

जन्म-मरण है ही नहीं; और जब है ही नहीं तो मेरे हाथ में कहां से आ जाएगा? जन्म-मरण तो इच्छा-अपेक्षा का है।

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वीडियो: माया को सस्ती क्यों कर देती है ब्रह्म की मस्ती ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2025-04-21