प्रश्नोत्तर P22-0120 · भाग 22
गुरु जी, साधु बनने की शुरुआत में चार चीजें मुख्य बताई जाती हैं — आसन, बासन, सोटा और कमंडल; डंडे को 'कोतवाल' भी कहते हैं, कहते हैं इसे हमेशा हाथ में रखना जरूरी है, इससे पहचान होती है। लेकिन फंसाव भी हो जाता है कि मन कमंडल में ही बस जाता है कि कहीं कोई ले न जाए — क्या इसीलिए आपने सब कुछ खत्म कर दिया?
सब कुछ खत्म करके, हमने बस अपने आप को रखा, और कुछ भी नहीं। मैं सबसे नहीं हूं, मुझसे सब है — तो मैं किसी को क्यों रखूं? जहां मैं जाऊंगा, सब है। सर्वप्रथम पहले मैं, बाद में कुछ और हो तो भी ठीक, न हो तो भी ठीक। मैंने अपने आप को गिराने के लिए कभी किसी को पकड़ा नहीं; मेरा स्तर उठेगा, तभी मैं किसी के साथ आगे बढ़ा। मेरे साथ कोई चलता भी था, तो — इस तरीके से चलोगे तो चलो, नहीं तो तुम कहीं और हम कहीं — एकदम साफ-साफ, सीधा बोलता था। कल बोलने से अच्छा आज बोल दूं, एक दिन का समय आपके साथ क्यों बर्बाद करूं। दबाव और संकोच में कभी जीवन नहीं होना चाहिए; अगर हुआ तो आप भ्रष्ट हो जाओगे। जहां दबाव-संकोच हो, उस व्यक्ति, उस जगह का त्याग कर दो — या तो वहां खुलकर बात करो, और नहीं कर पा रहे तो उस जगह से हट जाओ; वहां आपका स्तर गिरेगा, उठेगा नहीं। कोई भी हो सामने, दबाव-संकोच में कभी बात मत करो; करना पड़ रहा है, तो तुरंत, जल्दी से जल्दी उस जगह, उस व्यक्ति का त्याग कर दीजिए, चाहे कुछ भी हो जाए — नहीं तो वह आपको भ्रष्ट कर देगा, गिरा देगा, कमजोर, लाचार, मजबूर बना देगा। इस दुनिया में कोई भी हो, क्या फर्क पड़ता है।
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वीडियो: हम जरूरतमंद की पहचान कैसे करें ? || pahchan kaise kare jaruratmand || #livesatsang · 2025-04-20