प्रश्नोत्तर P22-0150 · भाग 22
गुरु जी, आपको कैसे लगा कि कुटिया यहीं बनानी है, यही वह जगह है?
अंदर से। मैं 2011 से घूम रहा हूं; मुझे यह जगह अध्यात्म के लिए कुछ अलग लगी। इसलिए 2019 से मैं इस जगह पे आना-जाना, रहना, सोना-उठना करता रहा, जांचता रहा — क्योंकि आने वाली पीढ़ी के लिए, लोगों के लिए काम करना था। जांचा तो लगा कि यहां से लोग अध्यात्म में बहुत तेजी से आगे बढ़ेंगे, इसलिए मैंने इस जगह पे कुटिया का निर्माण किया — जैसे दो जमीन होती हैं, एक उपजाऊ और एक बंजर। यहां इतनी शांति है कि यहां रहना भी आसान नहीं; लोग इतनी शांति बर्दाश्त नहीं कर पाते, कुछ लोग भाग जाते हैं, क्योंकि उन्हें अशांति चाहिए। आपस में बातचीत क्यों करते हैं? अशांति के लिए — इतनी शांति बर्दाश्त नहीं होती, तो जाकर पूछेंगे "आप कहां से हैं", और बात चालू। कहावत है — दो गधे मिले, लातम-लाती हुई। जीवन में व्यक्ति तब आगे बढ़ता है जब एक सिखाने वाला हो और एक सीखने वाला हो; दोनों सीखने वाले आपस में बात करें तो कुछ नहीं होगा, एक-दूसरे को अशांति और कचरा ही बांटेंगे। आप जहां गए हो, वहां के पूरे नियम में रहिए, फिर देखिए कैसे आगे बढ़ते हो। लोगों की प्रवृत्ति है कि नियम तोड़कर लगता है मैं कुछ हूं — लेकिन मैं यहां किसी को कुछ बनने नहीं दूंगा; बनके ही तो परेशान हो।
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वीडियो: हमारे अंदर कितनी अच्छाई है उतनी ही बुराई है क्या ? #livesatsang #yogiji_ka_satsang · 2025-04-19