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प्रश्नोत्तर P23-0079 · भाग 23

गुरु जी, एक चीज और समझ में नहीं आ रही — कहते हैं परमात्मा ने, खुदा ने आपको बिल्कुल फ्री हैंड छोड़ दिया, जो करना चाहो करो, सही करो या गलत; लेकिन दूसरे हाथ में पकड़ भी रखा है — ऐसा कानून बनाया है जो सीबीआई से भी ज्यादा पावरफुल है, थोड़ी सी गलती की तो सजा मिलेगी। यह कैसे?

देखिए, इस ब्रह्मांड में तीन गुण हैं — सात्विक, राजसी, तामसी (सतोगुण, रजोगुण, तमोगुण)। मानव में ऐसी प्रवृत्ति है कि आप गुरु (पैगंबर) भी बन सकते हो, देवता (पीर) भी बन सकते हो, राक्षस (शैतान) भी बन सकते हो। इस शरीर में कर्ता का अधिकार दिया गया है; बाकी जितने शरीर हैं उनमें कर्ता का अधिकार नहीं दिया गया — जानवर को कभी शैतान या देवता नहीं बोला जाता, उसके अंदर यह क्वालिटी नहीं है; उनमें भोग और भोजन फ्री में है। मानव शरीर में यह क्वालिटी है कि तीन में से क्या अपनाना है, आप स्वतंत्र हो। सात्विक प्रवृत्ति अपनाओगे — अपना दिया, अपना लिया — तो सीधा उससे कांटेक्ट हो जाएगा; राजसी-तामसी में जाओगे, राक्षस में या देवता में, तो इस जगत में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा। देवता भी मनुष्य होते हैं — जैसे कोई मनुष्य अपराध करके कैदी हो गया, जेल से छूटा तो फिर मनुष्य कहलाता है। कोई भी जीवात्मा मनुष्य शरीर में आई, तो वह अपने आप को तीन में से कुछ भी बना सकती है। कर्म आप कर रहे हो — दूसरों को सता रहे हो, झूठ बोल रहे हो, बेईमानी-दुष्कर्म कर रहे हो, तो राक्षस हो, शैतान हो; लोगों की सेवा कर रहे हो, धर्मशाला बनवा रहे हो, समाज के लिए व्यवस्था कर रहे हो, तो देवता-प्रवृत्ति, पीर हो; और परमात्मा के यहां जाने का, निकलने का मार्ग बता रहे हो तो पैगंबर, गुरु हो गए। अगर आप उस कर्ता के अधिकार का दुरुपयोग करोगे, तो परिणाम आप भोगोगे।

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वीडियो: अभेद होते हुए भी भेद क्यों लगता है ? #livesatsang #livesatsangyogijika · 2025-03-07