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प्रश्नोत्तर P23-0089 · भाग 23

गुरु जी, मोह क्या है? और लोग जो पशु-पक्षी पाल लेते हैं, उसके सहारे जीने लगते हैं — क्या पालना चाहिए?

मोह मतलब — जिससे हमें अपने तरीके से कुछ मिलता है; जब मिलता है तो आसक्ति हो जाती है कि वह कहीं चला ना जाए, चला जाएगा तो मिलेगा नहीं — उसके प्रति आसक्ति बंधन हो जाता है। सबसे ज्यादा मोह होता है जहां से पांचों इंद्रियों को सुख मिलता है — नर-मादा के मिलन में, या पुत्र-मोह। पशु में भी हो सकता है — दूध दे रही है, आप पर निर्भर है, बहुत सुंदर-प्यारा लग रहा है, तुम्हारे तरीके से चल रहा है, बुलाया तो आ गया, बात मानने लगा — तो मोह हो जाता है। ज्यादातर लोग इस मार्ग में आगे नहीं बढ़ते तो पशु-पक्षी पाल लेते हैं, उसके सहारे जीने लगते हैं। पक्षी तो नहीं पालना चाहिए — उसे स्वतंत्र करो, उसको जीने दो; पशु पाल सकते हो। लेकिन संन्यासी को, खोजी व्यक्ति को कभी कुछ नहीं पालना चाहिए — पाला तो फंस जाएगा, कहीं जा ही नहीं पाएगा, उसे लेके भी नहीं जा सकता। संन्यासी को बांधने वाला कोई काम करना ही नहीं चाहिए — ज्ञान तक; ज्ञान हो जाए तो बात खत्म।

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वीडियो: अभेद होते हुए भी भेद क्यों लगता है ? #livesatsang #livesatsangyogijika · 2025-03-07