प्रश्नोत्तर P23-0092 · भाग 23
गुरु जी, मुझे यह जानना है कि जीव, माया और ब्रह्म — तीनों में अंतर क्या है, तीनों का आपस में संबंध क्या है, और हम ब्रह्म तक कैसे पहुंच सकते हैं?
मैं जिस स्थिति में अभी हूं, मेरे सामने माया है; ब्रह्म का पता मेरे जीवन में नहीं है — है तो सिर्फ एक जानकारी, जो सही भी हो सकती है, गलत भी। अब देखना है कि मैं किस स्थिति में हूं — क्या मैं इस स्थिति में रहना चाहता हूं? क्या मैं महसूस कर पा रहा हूं कि मेरी स्थिति अशांत है? क्या मैं इससे निकलना चाहता हूं? यह संसार है, इसको एक तरह माया बोला गया है। इस माया से हमें कोई तकलीफ नहीं है; यहां हर व्यक्ति की अलग-अलग दुनिया है, और सबकी दुनिया में अलग-अलग लोग हैं। हम प्रभु की माया से परेशान नहीं हैं, अपनी माया से परेशान हैं — और अपनी माया हम स्वयं बनाते हैं। यह शरीर सिर्फ एक मशीन है, इसका उपयोग आप ही करते हो; बुद्धि निर्णय लेने में, आदान-प्रदान में सहायक होती है। हम उस माया से परेशान हैं जिसका निर्माण हमने बेईमानी के द्वारा, दुष्कर्म के द्वारा किया है, और उसी माया में ग्रसित हो गए हैं। अब निकलना चाह रहे हैं तो लोग कह रहे हैं — हिसाब करो तब निकलो, मेरी भरपाई कर दो तब जाओ — क्योंकि हमने लेनदेन कर लिया है। निकलना है तो लेनदेन पूरा करो — ईमानदारी और सत्कर्म के साथ जीवन जीते हुए अपना कर्तव्य करो। और जीव — अगर आप इच्छा और अपेक्षा में हो तो जीव की स्थिति है; तो जीव का नाश करना पड़ेगा, जीव के पीछे आत्मा है। आत्मा इस शरीर में आई, उसे कर्ता का अधिकार है, और इच्छा-अपेक्षा में वह जीवात्मा हो गई — जैसे पानी फ्रिज में गया तो ठंड की वजह से बर्फ बन गया; नॉर्मल जगह लाओ, फिर वैसा का वैसा हो जाएगा। इच्छा-अपेक्षा से अपने आप को छुड़ा दो तो जीव का नाश हो जाएगा, आप आत्मा में स्थिर हो जाओगे, और आत्मा फिर परमात्मा की यात्रा करेगी। तो ब्रह्म से आत्मा है, ब्रह्म से माया है; आत्मा जीवात्मा हो गई है। आपने अपने आप को बदल दिया है, अपना अस्तित्व बना लिया है — आपके बनाए हुए अस्तित्व का आपको नाश करना पड़ेगा।
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वीडियो: जीव , माया और ब्रह्म क्या है ? #livesatsangyogijika #aadhyatmik_satsang #yogijikasatsang · 2025-03-09