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प्रश्नोत्तर P23-0103 · भाग 23

गुरु जी, एक भाषा में कहा जाए तो मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार, काम, क्रोध, लोभ — ये सब शरीर में हैं? कुछ लोग अंतःकरण चतुष्टय बताते हैं — मन, बुद्धि, चित्त और आखिर में अहंकार — कि अहंकार नष्ट किए बिना सर्वेश्वर तक नहीं पहुंचोगे।

नहीं, शरीर में नहीं हैं। ये सब घटनाओं में आते और जाते हैं — देश, काल, स्थिति, परिस्थिति में आते हैं और जाते हैं, शरीर में रहते नहीं। अहंकार कैसे आता है, समझना — जब आप किसी को नीचा दिखाना चाहते हो, तब अहं भाव आता है; और नीचा दिखाने में जब उसे प्रतिक्रिया देते हो, तो वह अहंकार होता है। अहंकार आया और गया — तो उसे नष्ट कैसे करोगे? जो जाता है उसे कैसे नष्ट करोगे? समझकर उसे छोड़ सकते हो — आने मत दो। वैसे ही काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद — ये सब आते-जाते हैं; आप एकदम पवित्र, शुद्ध आत्मा हो। आप चाहो तो तुरंत यह सब आना-जाना बंद कर सकते हो — कुछ नहीं चाहिए में आ जाओ, उम्मीद छोड़ दो, बस खत्म। अपने तरीके से चाहिए का त्याग करो — आपने कुछ चाहा, उसने आपके तरीके से नहीं किया, तो आ गया गुस्सा; कर दिया तो आ गया राग — बस यही है। तो अपने तरीके से क्यों चाहो? उचित तरीका अपनाओ, जो आपके हित में हो, उसके हित में हो।

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वीडियो: जीव , माया और ब्रह्म क्या है ? #livesatsangyogijika #aadhyatmik_satsang #yogijikasatsang · 2025-03-09