आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P23-0105 · भाग 23

गुरु जी, दिन भर जो कार्य हमारे द्वारा होते हैं, कुछ समय जानते हुए करते हैं, कुछ अनजाने में अचानक होते रहते हैं। तो कोई ऐसी युक्ति हो, कोई सूत्र, कि 24 घंटे हम सजग रहें, जानते हुए करें — आजकल जो सजगता, अवेयरनेस की बात बताई जाती है?

क्या बिना जाने करते हो? खाना फटाफट खा लिया, पूरा चबाया भी नहीं — तो भी मुंह में ही डाल रहे हो ना, आंख में तो कभी नहीं डाला? पेशाब करने जाते हो तो बाथरूम ही करते हो — कभी ऐसा धोखा हुआ? अनजाने में कुछ नहीं होता, सब समझ-सूझबूझ के साथ होता है। अनजाने में हो जाए, तब तो तुम पागल हो, मंदबुद्धि हो या अबोध हो। जरूरत थी, खुजा लिया — उसे गिन के क्या करोगे? बस अपने आप को पढ़ाना बंद करो, नहीं तो और फंस जाओगे। और ध्यान रखना — ईमानदारी से ज्यादा समझ बेईमानी में लगती है; बेईमानी में बहुत सचेत रहना पड़ता है, होशपूर्वक बेईमानी होती है; भटकने में भी बहुत समझदारी चाहिए। इसलिए अपने आप को धोखा मत दो, सच्चाई का सामना करो और आगे बढ़ जाओ। क्या चाहिए, पक्का कर लो, उसके लिए काम करना पड़ेगा — बातों से बात नहीं बनेगी। यह सब ट्रेंड चल गया है मार्केट में — "ऐसी प्रैक्टिस करो कि जागरूकता नींद में प्रवेश कर जाए, शरीर सो रहा है मैं जाग रहा हूं" — फालतू बातें हैं। नए-नए शब्दों में उलझ गए हो। जिससे कुछ हो सकता है — ईमानदारी-सत्कर्म — काश उसको पकड़ लेते, और बढ़िया से सोते, खाते, कपड़ा पहनते, घूमते, इज्जत की जिंदगी जीते, खुद अपनी इज्जत करते। बस कुछ पाना, कुछ पाना — कभी भौतिक के नाम से, कभी अध्यात्म के नाम से; अब अध्यात्म में भटक रहे हो। मेरा तो बस यही कहना है कि ईमानदारी-सत्कर्म अपनाकर जीवन जियो, बात खत्म।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: जीव , माया और ब्रह्म क्या है ? #livesatsangyogijika #aadhyatmik_satsang #yogijikasatsang · 2025-03-09