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प्रश्नोत्तर P23-0120 · भाग 23

गुरु जी, जीव अपने नाश होने से भी डरता है और ब्रह्म से मिलना भी चाहता है — दोनों करना चाहता है। तो क्या जीव का नाश गुरु के सानिध्य में हो जाता है?

रहेगा तो पक्का मिट जाएगा — मेन बात रहना है, और सबसे कठिन है गुरु के पास रहना। अगर पक्का उपलब्धि चाहिए तो और कोई रास्ता नहीं — उसकी शरण में, सानिध्य में जीना ही पड़ेगा, रहना पड़ेगा। लेकिन उसकी शरण में रहना सबसे कठिन है, क्योंकि वह आपका अस्तित्व मिटा देगा। कोई अकेले अपनी इच्छा से, प्रयास से चाहे तो नहीं होगा। जैसे संसार में कोई मादा योग्य है, कोई नर भी योग्य है, लेकिन दोनों ना मिलें तो वह सोचे कि मैं मां बन जाऊंगी — ऐसा हो ही नहीं सकता; मादा को नर का, नर को मादा का सहारा लेना पड़ेगा। वैसे ही इस भवसागर से मुक्त होने के लिए आपको गुरु का सहारा तो लेना ही पड़ेगा।

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वीडियो: जीव , माया और ब्रह्म क्या है ? #livesatsangyogijika #aadhyatmik_satsang #yogijikasatsang · 2025-03-09