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प्रश्नोत्तर P23-0132 · भाग 23

गुरु जी, लोग बहुत लालची हो गए हैं, पैसों के लिए मानवता भी बेच देते हैं। जीवन है तो रोजाना कई लोगों से लेनदेन भी होता है। ऐसे लालची लोगों से स्वयं को कैसे निकालें, इस राग-द्वेष से कैसे मुक्त हों?

ईमानदारी से अपना काम करें, और किसी से भी अगर लेनदेन करें तो प्रूफ होना चाहिए, लिखा-पढ़ी होना चाहिए। मैं तो यही कहूंगा।

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