प्रश्नोत्तर P23-0151 · भाग 23
गुरु जी, ईमानदारी के परे क्या है? और अगर ईमानदारी के परे मैं हूं, तो फिर क्या मैं ब्रह्म हूं?
ईमानदारी के परे तुम हो, जहां ईमानदारी भी छूट जाती है। (फिर पूछने पर:) अहम का नाश करो — ब्रह्म है। तुम्हारे अलावा ब्रह्म है।
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