आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P24-0004 · भाग 24

गुरु जी, बोलने वाला तो वह एक ही है, वह शरीर के माध्यम से बोल रहा है — फिर द्वंद कहां है?

शरीर में हूं नहीं, मन में हूं नहीं, तो बोल किससे रहा है? बोलने के लिए दो चाहिए ना, अकेले कैसे बोलेगा आदमी — बहुत गहराई से समझो। अगर एक ही है तो फिर किसको समझाना; समझाने के लिए दो चाहिए, एक समझने वाला एक समझाने वाला। अर्जुन को समझाया गया, विराट रूप दिखाया गया, लेकिन देखने के बाद भी जब अभिमन्यु मारे गए तो अर्जुन बोले कि मैं होता तो मेरा पुत्र मारा नहीं जाता — मतलब ज्ञान होने के बाद भी पुत्र मोह में अपने को अलग समझे, पुत्र को अलग समझे। इतना आसान नहीं है इससे निकलना। इसीलिए अपनी किताबों को पढ़ के अपनी स्थिति मत मान लो — जिन्होंने बोला कि एक ही है, उन्होंने पहुंच के बोला, और तुम यहीं से, द्वैत में होके कह रहे हो कि एक ही है।

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वीडियो: साधना में ध्यान रखने योग्य विशेष ज्ञान / #योगीजी_का_सत्संग #साधना #ध्यान #ज्ञान · 2024-08-01