आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P24-0010 · भाग 24

गुरु जी, रामकृष्ण परमहंस उपलब्धि के बाद भी माता की पूजा करते थे — अद्वैत में जाने के बाद वे द्वैत में कैसे आए, जब एक ही है तो किसकी पूजा?

वही तो समझना है। आप लोग अद्वैत का मतलब बस एक ही समझते हो कि एक के अलावा कुछ नहीं है। जब कुछ होता ही नहीं तो इतना भटकाव, इतनी पीड़ा, इतनी परेशानियां क्यों होतीं, क्यों प्रयास करते कि अपने आप को निर्विकार करो? और सब में वही होता तो सबको बैठे-बैठे मुक्त करा देता, जाकर समझाता क्यों। अद्वैत में अगर कोई पहुंच गया, ब्रह्म समान हो गया, और घर-घर जाकर प्रयास कर रहा है कि लोग निर्विकार हों — तो इस इच्छा में कामना नहीं है, जगत कल्याण है; लेकिन इच्छा तो है कि यह भी मुक्ति की तरफ, मोक्ष की तरफ बढ़ जाए, तो अपने से अलग समझ रहा है। वह ब्रह्म हो जाता तो एक ही जगह से सबको मुक्त करा देता; गांव-गांव मेहनत कर रहा है, समझा रहा है — इसलिए वह ब्रह्म नहीं, ब्रह्म के समान हुआ है। अद्वैत का मतलब यह न समझो कि एक ही है — अनंत आत्माएं हैं, और उसके बाद अनंत जीवात्माएं; इसे समझने का प्रयास करिए।

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वीडियो: साधना में ध्यान रखने योग्य विशेष ज्ञान / #योगीजी_का_सत्संग #साधना #ध्यान #ज्ञान · 2024-08-01