प्रश्नोत्तर P24-0038 · भाग 24
गुरु जी, समाधि के अनुभव के बारे में कुछ बताइए।
उसका कोई अनुभव नहीं बोला जा सकता। बस इतना बोला जा सकता है कि वहां कुछ नहीं होता — ना कोई इच्छा, ना कोई अपेक्षा, ना कोई अच्छा, ना कोई बुरा, ना कोई राग, ना कोई द्वेष, ना कोई मेरा, ना कोई तेरा; ना कुछ चाहिए — ऐसा भी नहीं कि नहीं चाहिए। वो स्थिति ही कुछ अजीब रहती है, जिसके बारे में बोला नहीं जा सकता — ना कहीं जाना है, ना कहीं पहुंचना है, ना कुछ पाना है, ना कुछ खोना है; सब खत्म हो जाता है। जैसे कोई स्त्री मां बनने वाली हो — बच्चा हो जाने के बाद कोई पूछेगा क्या हुआ, तो बोलेगी दर्द हुआ था, बस। लेकिन वो दर्द का एहसास एक मां ही समझ सकती है, और कोई नहीं। पूछोगे दर्द कैसा था, बोलेगी बहुत — और क्या बताएगी, कैसे बताए? तो वैसे ही समाधि की स्थिति होती है।
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वीडियो: आत्म परिचय क्या है ?#yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान #साधना · 2026-07-06