प्रश्नोत्तर P24-0116 · भाग 24
गुरु महाराज, परमात्मा-भगवान, जिससे हमारा मिलना होगा — वह रूप है?
वो रूप से परे है। वो खुद आप हो, तुम हो। रूप का तो नाश हो जाएगा। शब्द, दृश्य, गंध, रस, स्पर्श से परे हो आप। और आप तभी मिल पाओगे, जब शब्द, दृश्य, गंध, रस, स्पर्श के द्वारा जिस पिंड में, जिस रूप में आप घुसे हो — उससे अपने आप को निकाल लोगे; तब अपने स्व में आ जाओगे।
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