आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P24-0138 · भाग 24

गुरु जी, बच्चों को अच्छी बातें सिखाते समय बच्चे सीखना नहीं चाहते, टालते रहते हैं, तो क्रोध आता है। क्या करें?

बच्चों को अच्छी बातें सिखाने से पहले, क्या आप उस अच्छाई पर चल रहे हो? अगर आप चलते, तो बच्चे देख के सीख जाते; आपको सिखाना नहीं पड़ता। अगर बच्चों को अलग से सिखाना पड़ रहा है, इसका मतलब आपका रहने का, उठने का, बैठने का, बोलने का माहौल अलग है, और आप बच्चों को कुछ अलग सिखाना चाहते हो। आप अलग तरीके से रह रहे हो, तो दोनों मैच नहीं हो रहा है। इसलिए बच्चे बाद में बहुत पिटाई करने वाले हैं, जब वह जवान हो जाएंगे। अभी वह कमजोर हैं, इसलिए आपकी डांट-डपट सब सुन रहे हैं। आप देखो कि जो कुछ आप उन्हें सिखा रहे हो, क्या उसमें आपका जीवन है? तब तो सिखाने की जरूरत नहीं, आपको देख के ही सीख लेते। सिखाना पड़ रहा है, इसका मतलब है कि आप कुछ और कर रहे हो और उनको कुछ और करवाना चाहते हो। क्योंकि बच्चे नकल करते हैं — वह मां-बाप को, भाई-बहन को देखकर सीखते हैं। तो घर का माहौल देखो क्या है।

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