आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P24-0146 · भाग 24

गुरु जी, कोई आकर मेरी कार को ठोक दे और फिर उल्टा मुझसे ही झगड़ा करे, तो हम सोचते हैं कि झगड़े में समय क्यों गंवाएं — ₹1000-2000 देकर निकल जाएं। क्या यह सही है?

आपको एक घटना बता रहा हूं। मैं था और एक बाबा जी थे; हम अमरकंटक की तरफ जा रहे थे। दो लोग मोटरसाइकिल पर झंडा लेकर जा रहे थे, उन्होंने रास्ता पूछा, तो हमने गाड़ी साइड में रोकी और रास्ता बताने लगे। तभी एक बाइक वाला आया और सीधा मारा। हम नीचे गिरे, चोट भी आई, खून निकला। उसका तो पूरा फूट गया था, दारू पिया था। उसने तुरंत बोला — बाबा ने ठोक दिया। फिर उसने गांव में फोन लगाया, लोग आए, बातचीत हुई तो पता चला कि गलती उसकी है। तो उन लोगों ने बोला — आप लोग निकल जाओ, जाने दो, छोड़ो। हम कहे — नहीं, हम नहीं निकलेंगे। क्यों निकल जाएं? कल कोई यही बोलेगा कि बाबा लोग ठोक के निकल गए। जो होगा देख लेंगे। पहले दवाखाना ले गए, उसकी पट्टी करवाई, और बाद में उसको खूब डांटा — दारू पीने के बाद गाड़ी चलाता है? आज तुझे कुछ हो जाता तो जिम्मेदार कौन होता? बाद में उसने माना कि मेरी गलती थी। चाहते तो हम उसी समय चले जाते, लेकिन फिर मानवता कहां रही? अगर हम गलत हैं तो सिद्ध करो। जवाब देना ही चाहिए। पहले तो गलत करो मत, फिर गलत सहो मत; नहीं तो तुम कमजोर व्यक्ति हो जाओगे, मानसिक तनाव हो जाएगा, समाज से अलग होते जाओगे और घुटन होने लगेगी कि यार सब बेकार लोग रहते हैं। अगर आप गलत हो तो माफी मांग लो या उसकी भरपाई करो; और गलत नहीं हो तो क्यों भरेंगे? जो भी होगा देखा जाएगा। आप सोचते हो लाइफ ठीक चल रही है, क्यों कॉम्प्लिकेट करें — लाइफ ठीक से नहीं चल रही, आपकी लाइफ घुटन में, कमजोरी में चल रही है। लाइफ ठीक से तब चलती है जब जवाब देते हो, जब सामना करते हो। और जिसे नीचे वाला समझते हो — नीचे वाला होता तो तुमसे झगड़ा ही नहीं करता। छोटा बालक मजबूत आदमी से लड़ेगा क्या? अगर लड़ रहा है तो जरूर उसके अंदर ताकत ज्यादा है; तुम्हें अपनी ताकत का भ्रम है। ताकतवर आदमी सामना करता है।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: साधना में आसन की शुद्धता का क्या महत्व है ? #yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #साधना #आध्यात्म · 2026-09-08