आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P29-0040 · भाग 29

स्वामी जी, आपने मुझे पेड़ के नीचे बैठकर आत्म-चिंतन करने को कहा था — आत्म-चिंतन यानी क्या, और इसे कैसे करूं?

आत्म-चिंतन मतलब — मैं शुद्ध आत्मा हूं, पवित्र आत्मा हूं; मेरे अंदर राग-द्वेष, मोह, आसक्ति, इच्छा, अपेक्षा कुछ नहीं है। मैं उस परम आनंद में कभी था, आज नहीं हूं। तो आनंद मुझसे दूर क्यों हो गया? मैं उस आनंद से दूर कैसे हुआ? अब मैं कहां हूं — जहां हूं, जिन लोगों के बीच में हूं, क्या मैं खुश हूं? अगर मैं वहां दुखी हूं, निराश हूं, हताश हूं, उदास हूं, बेचैन हूं, तो मैं वहां से अपने आप को कैसे निकालूं। पहले यह देखना है कि मैं कहां-कहां दुखी हूं; फिर कारण देखना है कि किस कारणवश मैं वहां फंसा हूं; फिर प्रयास करना है कि अपने आप को इस दुख के भवसागर से कैसे निकाल लूं और उस परम आनंद में कैसे ले जाऊं — यही आत्मिक चिंतन है।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: 38 सुबह अपनों की कुटिया हरियाणा यमुना तट #योगी · 2026-10-31