प्रश्नोत्तर P29-0041 · भाग 29
स्वामी जी, बैठता हूं तो विचारों को अपने से दूर करके देखने पर एक आनंद आता है, और विचारों में खो जाऊं तो 15-20 मिनट पता नहीं लगता कि हो क्या रहा है — वह क्या अवस्था है?
विचार मतलब मैं राग-द्वेष में कहीं फंसा हूं। अगर कोई विचार मुझे परेशान कर रहा है, तो इसका मतलब मैं राग-द्वेष में फंसा हूं; तो मैं उस राग-द्वेष से कैसे निकलूं, उसके लिए आत्मिक चिंतन करना है। सुबह या शाम नियम बना लो कि मुझे एक से दो घंटे के लिए कुटिया जाना है और आत्मिक चिंतन के लिए बैठना है — रोज, कुछ भी हो जाए, यह नहीं छोड़ना है। जैसे पानी में गंदगी हो तो हाथ से हटाने से नहीं जाती, छान लो तो भी नहीं जाती, लेकिन जरा सी फिटकरी डाल दो तो वह अपने आप मैल को नीचे बैठा देती है। ऐसे ही जब बैठोगे, तो आपके जितने प्रश्न हैं वे निकलने लगेंगे, सब दिखने लगेगा कि मैं कहां-कहां फंसा हूं, फिर कैसे निकलूं।
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वीडियो: 38 सुबह अपनों की कुटिया हरियाणा यमुना तट #योगी · 2026-10-31