प्रश्नोत्तर P29-0050 · भाग 29
गुरु जी, क्या किसी भी मार्ग वाले (अपनों की कुटिया में) साधना कर सकते हैं? क्या कोई बाहरी क्रिया नहीं करनी?
किसी भी मार्ग से आओ, बस बाहर चिल्ला के नहीं करना है, आत्मिक चिंतन करना है। आप कैसे भी साधना करो, आपको भोजन और रहने की व्यवस्था मिल जाएगी, लेकिन आप बाहर की क्रियाएं नहीं कर सकते — कोई चिल्ला के माला जपने लगा, आरती करने लगा, योगा करने लगा, तो नहीं। जो करना है, अंदर करो; किसी को तकलीफ नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यह अपनों की कुटिया है। यहां बैकग्राउंड काम नहीं करता — यहां एक ही व्यवस्था है, मेरे लिए भी। अपनी अमीरी-गरीबी वहीं छोड़ के आना; आना तो साधक बनके आना, निर्विकार होने के लिए आना, राग-द्वेष, मोह, आसक्ति, इच्छा, अपेक्षा से मुक्त होने के लिए आना, अपने बनाए हुए अस्तित्व को मिटाने आना — कुछ बनने मत आना।
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वीडियो: गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु का क्या कर्तव्य है शिष्य के प्रति / #योगीजी_का_सत्संग #गुरु #पूर्णिमा · 2024-07-21