प्रश्नोत्तर P29-0051 · भाग 29
गुरु जी, आपने बताया था कि समर्पित होकर भक्ति करो — समर्पित होकर भक्ति कैसे करें?
समर्पण करके भक्ति करो; भक्ति के बाद समर्पण मत करो। भाव पहले बनाओ कि मुझे इष्ट के प्रति समर्पित हो जाना है। बाद में उसकी ताकत से समर्पण क्यों करना? अपनी ताकत से समर्पण कर दो — कि मुझे कुछ भी नहीं चाहिए; शक तुझे होगा, मुझे नहीं है; तुझे शक है तो जितनी परीक्षा लेनी है ले ले, लेकिन मुझे सच में तुझसे कुछ नहीं चाहिए। परीक्षा तो देनी पड़ेगी — प्रिंसिपल का बालक भी स्कूल में पढ़े तो उसे भी परीक्षा देनी पड़ती है; यह सृष्टि की व्यवस्था है। यह मत सोचो कि भक्ति में समर्पण हो जाऊंगा; इतना तो कर ही सकते हो।
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वीडियो: गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु का क्या कर्तव्य है शिष्य के प्रति / #योगीजी_का_सत्संग #गुरु #पूर्णिमा · 2024-07-21