प्रश्नोत्तर P29-0053 · भाग 29
स्वामी जी, अष्टावक्र गीता में उल्लेख है कि मुक्ति तत्क्षण संभव है — राजा जनक घोड़े पर बैठते ही आत्म-ज्ञान को उपलब्ध हुए। यह कौन सी मुक्ति की बात हो रही है?
मुक्ति तुरंत संभव है, और इसके बारे में मैंने कई बार बता दिया है। जैसे आप कर्म करते हुए छल, कपट, चोरी, बेईमानी, चापलूसी, मक्कारी, धूर्तता, पाखंड करना वर्तमान में बंद कर दीजिए; दिखावा करना बंद कर दीजिए; बड़ा-छोटा बनने का त्याग करिए; अपने तरीके से "चाहिए" का त्याग करिए; योग्यता से ज्यादा "चाहिए" का त्याग करिए; और ईमानदारी से जीवन जिए — तुरंत आप मुक्त हो गए। फिर अपने आप को सत्कर्म में लगाकर मोक्ष तक ले जा सकते हैं। जैसे विद्यार्थी तो आप तुरंत बन गए, फिर हर परीक्षा पास करते-करते एक समय डिग्री मिल जाती है। इसमें पेपर देने वाले भी आप हो, कॉपी जांचने वाले भी आप, नंबर देने वाले भी आप — पास करने वाले, फेल करने वाले, सब तुम ही हो।
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वीडियो: गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु का क्या कर्तव्य है शिष्य के प्रति / #योगीजी_का_सत्संग #गुरु #पूर्णिमा · 2024-07-21