प्रश्नोत्तर P29-0070 · भाग 29
गुरु जी, दृश्य और दृष्टा में क्या अंतर है?
जब तक कामनाओं में हैं, तब तक दर्शन की इच्छा है; और कामनाओं से मुक्त हो गए तो आत्म दर्शन हो गया, बस खत्म। तो कामनाओं की जो इच्छा है उसका त्याग करो। हम फंसे हैं दृश्य में — जो पहले नहीं था और आगे नहीं रहेगा, मिथ्या — और दृष्टा जो है उसमें हम जा ही नहीं पा रहे, क्योंकि हम "मेरा" में हैं; दृश्य "मेरा" में है और उसमें कामनाएं हैं। जो महापुरुष परम स्थिति को उपलब्ध हुए, वे भी लोगों को ज्ञान देने दृश्य में गए, लेकिन वे दृश्य के बंधन में नहीं थे, आसक्ति नहीं थी। तो अपने आप को आसक्ति से छुड़ाओ। शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गंध — पांच इंद्रियों द्वारा हम जरूरत भी पूरी करते हैं, और वह जरूरत कामना बन जाती है। तो अपने आप को कामनाओं से छुड़ाओ।
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वीडियो: गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु का क्या कर्तव्य है शिष्य के प्रति / #योगीजी_का_सत्संग #गुरु #पूर्णिमा · 2024-07-21