प्रश्नोत्तर P29-0117 · भाग 29
गुरु जी, हमारे देश में बेरोजगारी के कारण कई लोगों को मजबूरी में ऐसा काम करना पड़ता है जो उनकी इच्छा का नहीं है। कहते हैं कि काम उत्साह से किया जाए तो सुबह से शाम तक थकान नहीं आती। क्या यह सही है?
अगर थोपा हुआ है तो थक जाता है। अगर वो उसमें होके, पूरा 100% होके कर रहा है, तो लोग देख के थक जाएंगे, वो नहीं थकेगा। शरीर थक जाएगा, लेकिन वो मानसिक नहीं थकेगा। और अगर थोपा हुआ है तो मानसिक थक जाएगा, शरीर भले ना थके — ये ध्यान रखना। काम वही करो जो आपके भी हित में हो, समाज हित में हो, परिवार हित में हो, और आपकी चॉइस हो — उसका चुनाव सोच-समझ के करना। मैं भी किसी फील्ड में हूं, मैं भी काम कर रहा हूं; मैं जब रोटी खाता हूं ना, तो देख लेता हूं कि मेरी मेहनत की है कि नहीं — मैं अपनी मेहनत की रोटी खाता हूं।
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