प्रश्नोत्तर P29-0133 · भाग 29
गुरु जी, हम तो बैठकर आत्मिक चिंतन करते हैं। क्या लेटकर भी आत्मिक चिंतन हो सकता है?
नहीं, लेटकर सोना हो जाएगा। क्योंकि जब आप लेटते हो तो आपका शरीर आराम में चला जाता है। अगर आपको कोई कहे कि खड़े होकर सो जाओ, तो सो पाओगे? नहीं। वैसे ही लेटकर आत्मिक चिंतन नहीं हो सकता। आत्मिक चिंतन हमेशा बैठकर, एकांत में होता है, जहां हम सिर्फ आत्मिक चिंतन के लिए बैठे हों — मोबाइल स्विच ऑफ हो, कोई और काम ना हो। ऐसा नहीं कि हम कुछ देख रहे हैं, किसी काम में लगे हैं और कहें कि आत्मिक चिंतन भी कर रहे हैं — ये दोनों नहीं हो सकते। फिर काम को ध्यान से करो, कि जो काम मैं कर रहा हूं वह ईमानदारी से हो।
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