आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P29-0164 · भाग 29

गुरु जी, क्या ईमानदारी स्वयं से करनी है?

ईमानदारी भी तो जब आप करोगे, कोई और रहेगा तभी ना। ईमानदारी हो चाहे बेईमानी हो, सामने कोई रहेगा तभी करोगे। ईमानदारी या बेईमानी के लिए कोई अपोजिट में चाहिए; अपोजिट में नहीं रहेगा तो ना ईमानदार हो ना बेईमान। यह बातों से बात नहीं बनने वाली है। मैं आज भी दिन-रात हर काम करता हूं — पानी भरना हो, साधकों को खिलाना हो, आश्रम में लैट्रिन भी धोना हो तो वह भी करता हूं। सारे कर्म बराबर हैं, छोटा-बड़ा नहीं है। करके ही आप निकलोगे, बिना किए नहीं निकलोगे, इसलिए करना सीख लो। जब बंधन ही अपने आप नहीं हुआ तो मुक्ति अपने आप कैसे होगी?

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वीडियो: सत्संग अपनों की कुटिया हरियाणा यमुना तट#योगी · 2026-10-31