प्रश्नोत्तर P29-0166 · भाग 29
गुरु जी, तो ऊर्जा सब में ही लगती है?
समय देना ही पड़ेगा, मेहनत करना ही पड़ेगा — चाहे मुक्ति के लिए, चाहे बंधन के लिए। आपके पास ऊर्जा है — धन की, तन की और समझ की। अब देखना है कहां लगा रहे हो; जहां लगाओगे वही बढ़ेगा। बंधन में लगाओगे तो घुटन होगी, और बंधन से मुक्त होने में लगाओगे तो आनंद की उपलब्धि होगी। और जितना दोगे, प्रकृति कई गुना देती है — एक बीज बोओ, कई गुना फल मिलता है। यह प्रकृति का नियम है।
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वीडियो: सत्संग अपनों की कुटिया हरियाणा यमुना तट#योगी · 2026-10-31