प्रश्नोत्तर P3-0050 · भाग 3
समाज छोड़ अकेले खड़ी — अध्यात्म में पूरी तरह आने में डर कि फिर कलंक लगे। सुरक्षा?
अध्यात्म में किसी को मत देखो — अपने जीवन देखो, मेरे द्वारा क्या। जीवन पर अधिकार; समाज को अधिकार क्यों दें? आत्मिक कल्याण के लिए पूरी तरह निकल जाओ। असुरक्षा की यात्रा — सुरक्षा घर पर; यहां गारंटी नहीं, रिस्क पूरा। झूठा आश्वासन देने वाला। स्व तक असुरक्षा-अव्यवस्था। शरीर से छोड़ा मानसिक नहीं — पूरा मानसिक छूटे तब उपलब्धि। विपरीत में याद आए = अटैचमेंट। अवधूत: कुछ नहीं चाहिए, खोज भी खत्म — तब उपलब्धि।
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वीडियो: मेरा जीवन कैसे आध्यात्मिक हो जाए ?योगीजी_का_सत्संग · 2025-09-04