प्रश्नोत्तर P3-0099 · भाग 3
दूसरी योनि में (जैसे जानवर) जो कर्म किया जाता है उसका क्या? और 84 लाख योनियों में घूमकर वापस मनुष्य जन्म किस कर्म की वजह से मिलता है — क्या पूरी 84 लाख योनियां घूमनी पड़ती हैं?
उसमें पाप-पुण्य है ही नहीं, उसमें बस भोग है — क्योंकि आपको भोग की इच्छा थी। इस जीवात्मा के पीछे पूर्ण आत्मा है; आपको जैसा चाहिए वैसा मिलता जाता है। यह प्रकृति कल्पवृक्ष की तरह है — जो आप मांग करते हो, आप यहां घूमने आए हो, प्रकृति का काम है आपको देना, जैसा आपको चाहिए और जिस लायक आप रहते हो।
जरूरी नहीं कि 84 मिलें। हो सकता है एक शरीर आपको पशु-पक्षी का मिल जाए, दूसरा फिर मानव का — कुछ बोल नहीं सकते। हो सकता है आपने सपना देखा 'काश मैं चिड़ियों की तरह आसमान में उड़ता', तो शरीर छूटे, आप चिड़िया बनें और फिर मानव में आ जाएं — क्योंकि आपने इतना तक ही मांगा था। हर इच्छा वह पूरी कर देता है; आप जैसी-जैसी मांग करते हो, वैसी-वैसी चीजें आपकी तरफ आने लगती हैं। अगर घूमकर आते तो सब एक जैसे पैदा होते — घूमकर नहीं आते। शेर बनना देखा है तो हो सकता है शेर बनकर, शेर की जिंदगी जीकर वापस आ जाओ। जैसे नाटक में आप कहते हो मुझे यह पात्र चाहिए, तो वह पात्र मिलता है, रोल करके फिर अपनी दुनिया में आ जाते हो।
अपने को राजा-रानी को नहीं पकड़ना, राजा-रानी से कुछ समझना है। एक ने कहा कहानी सुनाओ — एक था राजा, एक थी रानी, बच्चे हुए, राजपाट भोगा, बच्चों की शादी हुई, उनके बच्चे हुए — फिर क्या हुआ? बेटा, फिर वही होगा। जब तक शादी करेंगे, बच्चे होंगे, यह चलता जाएगा। जिस दिन यह समझ में आ जाएगा कि हम तो कुछ और करने आए थे, तब वह होगा।
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