प्रश्नोत्तर P3-0103 · भाग 3
जैसे कहते हैं कि वह खुद तर गया तो सात पीढ़ी को तार दिया — मां-बाप का भाव रहता है कि हमने तुम्हारे लिए किया, अब तुम्हारी बारी आई तो तुम मुक्ति की तरफ जा रहे हो, यहां रुको। ऐसे में क्या करें?
मैंने नहीं बोला। सबके माता-पिता यही बोलते हैं — 7, 21, 108, कितना भी बोल दो, क्या जाता है। माता-पिता का यह भाव रहता है कि हमने तुम्हारे लिए किया, तुम्हारी बारी आई तो तुम मुक्ति की तरफ जा रहे हो, अब हमारी करने की बारी है, यहां रुको, फंसो। वे भी सही कह रहे हैं — उनकी सेवा करते-करते भी कर सकते हो; आप क्यों फंस रहे हो?
आप माता-पिता से बोलिए — आपको क्या जरूरत है? आप उनकी सेवा करिए, बस। हम आपकी सेवा करेंगे, बोलो जरूरत क्या है। हम साधना कहीं भी करें, जब भी जरूरत हो मुझे फोन कर देना, हम आ जाएंगे — लेकिन आपकी जरूरत के लिए आएंगे, किसी और के लिए नहीं। आपको क्या चाहिए, बोलिए — अगर हमारा कोई कर्तव्य-दायित्व बनता है तो। और अगर कोई और सेवा करने वाला है और फिर भी जबरदस्ती कह रहे हैं, तो यह भी गड़बड़ है।
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